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mahabharat 10.11.18: ‘शुभ! आप धर्म के ज्ञाता हैं। आपके पुत्र और भाई धर्मपूर्वक युद्ध करके धर्मपूर्वक मर गए हैं; इसलिए आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.11.18 
धर्म्यं धर्मेण धर्मज्ञे प्राप्तास्ते निधनं शुभे।
पुत्रास्ते भ्रातरश्चैव तान्न शोचितुमर्हसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘शुभ! आप धर्म के ज्ञाता हैं। आपके पुत्र और भाई धर्मपूर्वक युद्ध करके धर्मपूर्वक मर गए हैं; इसलिए आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए॥18॥
 
‘Shubh! You are the knower of Dharma. Your sons and brothers have fought a righteous war and have died a righteous death; therefore you should not grieve for them.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)