परिश्रान्ते विदीर्णे वा भुञ्जाने वापि शत्रुभि:॥ ५३॥
प्रस्थाने वा प्रवेशे वा प्रहर्तव्यं रिपोर्बलम्।
अनुवाद
‘यदि शत्रु सेना बहुत थकी हुई हो, बिखरी हुई हो, खा रही हो, कहीं जा रही हो या किसी विशेष स्थान में प्रवेश कर रही हो, तो भी विरोधियों को उस पर आक्रमण करना चाहिए ॥53 1/2॥
‘Even if the enemy army is very tired, dispersed, eating, going somewhere or entering a particular place, the opponents must still attack it. ॥ 53 1/2॥