श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  10.1.42-43h 
क्षणेनाहन् स बलवान् येऽस्य दृष्टिपथे स्थिता:।
तेषां शरीरावयवै: शरीरैश्च विशाम्पते॥ ४२॥
न्यग्रोधमण्डलं सर्वं संछन्नं सर्वतोऽभवत्।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! उस बलवान उल्लू ने क्षण भर में ही अपनी दृष्टि में आने वाले समस्त कौओं को मार डाला। इससे वह समस्त वटवृक्ष चारों ओर से कौओं के शरीरों तथा उनके विविध अंगों से ढक गया। 42 1/2॥
 
Prajanath! That powerful owl killed all the crows that came within its sight in a moment. Due to this, the entire banyan tree got covered from all sides with the bodies of crows and their various parts. 42 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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