श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.99.6 
तस्याश्रमपदं पुण्यं मृगपक्षिसमन्वितम्।
मेरो: पार्श्वे नगेन्द्रस्य सर्वर्तुकुसुमावृतम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उनका पवित्र आश्रम मेरु पर्वत के किनारे स्थित है, जो हिरणों और पक्षियों से भरा हुआ है। हर ऋतु में खिलने वाले फूल उस आश्रम की शोभा बढ़ाते हैं।
 
His holy hermitage is situated on the side of Mount Meru, which is full of deer and birds. Flowers which bloom in all seasons enhance the beauty of that hermitage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)