श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.99.5 
गङ्गोवाच
यं लेभे वरुण: पुत्रं पुरा भरतसत्तम।
वसिष्ठनामा स मुनि: ख्यात आपव इत्युत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
गंगाजी बोलीं- भरतश्रेष्ठ! प्राचीन काल में वशिष्ठ नाम के जिन ऋषि को वरुण ने पुत्र रूप में प्राप्त किया था, वे 'आपव' नाम से प्रसिद्ध हैं॥5॥
 
Ganga said – Bharatshrestha! In ancient times, the sage named Vashishtha, whom Varun had received in the form of a son, is famous by the name 'Aapav'. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)