vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा
»
श्लोक 47
श्लोक
1.99.47
स तु देवव्रतो नाम गाङ्गेय इति चाभवत्।
द्युनामा शान्तनो: पुत्र: शान्तनोरधिको गुणै:॥ ४७॥
अनुवाद
उस बालक का नाम देवव्रत रखा गया। कुछ लोग उसे गांगेय भी कहते थे। द्यु* नामक वसु शान्तनु का पुत्र हुआ और गुणों में उससे बढ़कर था। 47.
That boy was named Devavrata. Some people also called him Gangaya. Vasu named Dyu* became the son of Shantanu and surpassed him in qualities. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×