श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.99.33 
एवं शशाप भगवान् वसूंस्तान् भरतर्षभ।
वशं क्रोधस्य सम्प्राप्त आपवो मुनिसत्तम:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतर्षभ! इस प्रकार भगवान वशिष्ठजी ने क्रोध में आकर उन वसुओं को शाप दे दिया॥33॥
 
Bharatarshbha! In this way the sage Lord Vashishtha, in a fit of anger, cursed those Vasus. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)