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mahabharat 1.99.30: तब तपोधन वसिष्ठजी उस वन में गाय को खोजने लगे; परंतु खोजने पर भी उन उदारचित्त महर्षि को वह गाय नहीं मिली॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.99.30 
तत: स मृगयामास वने तस्मिंस्तपोधन:।
नाध्यगच्छच्च मृगयंस्तां गां मुनिरुदारधी:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तब तपोधन वसिष्ठजी उस वन में गाय को खोजने लगे; परंतु खोजने पर भी उन उदारचित्त महर्षि को वह गाय नहीं मिली॥30॥
 
Then Tapodhan Vasishthaji started searching for singing in that forest; But even after searching, that generous minded Maharishi could not find that cow. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)