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mahabharat 1.99.15-21: बैल के समान विशाल नेत्रों वाले राजा! उस देवी ने दियो नामक वसुको को वह शुभ गौ दिखाई, जो अत्यन्त स्वस्थ थी। उसके थन अत्यन्त सुन्दर, दूध से भरे हुए थे, उसकी पूँछ और खुर भी बहुत अच्छे थे। वह सुन्दर गौ सभी गुणों से सम्पन्न और उत्तम आचरण वाली थी। पुरुवंश का सुख बढ़ाने वाले सम्राट! इस प्रकार प्राचीन काल में वसुका का आनन्द बढ़ाने वाली देवी ने अपने पति वसुको को ऐसी सद्गुणों वाली गौ दिखाई। गजराज के समान पराक्रमी राजा! दियोना ने उस गौ को देखते ही उसके रूप और गुणों का वर्णन किया और अपनी पत्नी से कहा, 'भूरे नेत्रों वाली यह सुन्दर गौ दिव्य है। वररोहे! यह वरुणनन्दन महर्षि वशिष्ठ की गौ है, जिनके लिए यह उत्तम तपोवन है। सुमध्यमे! जो मनुष्य इसका स्वादिष्ट दूध पीएगा, वह दस हजार वर्ष तक जीवित रहेगा और उस अवधि तक उसकी जवानी बनी रहेगी।' नृपश्रेष्ठ! यह सुनकर सुन्दर कमर और निश्छल शरीर वाली देवी ने अपने यशस्वी पति से कहा - 'मेरे प्रिय पतिदेव! मनुष्य लोक में एक राजकुमारी मेरी सखी है।'   |   mahabharat अध्याय 1.99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 15-21
 
 
श्लोक  1.99.15-21 
द्यवे वै दर्शयामास तां गां गोवृषभेक्षण।
आपीनां च सुदोग्ध्रीं च सुवालधिखुरां शुभाम्॥ १५॥
उपपन्नां गुणै: सर्वै: शीलेनानुत्तमेन च।
एवंगुणसमायुक्तां वसवे वसुनन्दिनी॥ १६॥
दर्शयामास राजेन्द्र पुरा पौरवनन्दन।
द्यौस्तदा तां तु दृष्ट्वैव गां गजेन्द्रेन्द्रविक्रम॥ १७॥
उवाच राजंस्तां देवीं तस्या रूपगुणान् वदन्।
एषा गौरुत्तमा देवी वारुणेरसितेक्षणा॥ १८॥
ऋषेस्तस्य वरारोहे यस्येदं वनमुत्तमम्।
अस्या: क्षीरं पिबेन्मर्त्य: स्वादु यो वै सुमध्यमे॥ १९॥
दशवर्षसहस्राणि स जीवेत् स्थिरयौवन:।
एतच्छ्रुत्वा तु सा देवी नृपोत्तम सुमध्यमा॥ २०॥
तमुवाचानवद्याङ्गी भर्तारं दीप्ततेजसम्।
अस्ति मे मानुषे लोके नरदेवात्मजा सखी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
बैल के समान विशाल नेत्रों वाले राजा! उस देवी ने दियो नामक वसुको को वह शुभ गौ दिखाई, जो अत्यन्त स्वस्थ थी। उसके थन अत्यन्त सुन्दर, दूध से भरे हुए थे, उसकी पूँछ और खुर भी बहुत अच्छे थे। वह सुन्दर गौ सभी गुणों से सम्पन्न और उत्तम आचरण वाली थी। पुरुवंश का सुख बढ़ाने वाले सम्राट! इस प्रकार प्राचीन काल में वसुका का आनन्द बढ़ाने वाली देवी ने अपने पति वसुको को ऐसी सद्गुणों वाली गौ दिखाई। गजराज के समान पराक्रमी राजा! दियोना ने उस गौ को देखते ही उसके रूप और गुणों का वर्णन किया और अपनी पत्नी से कहा, 'भूरे नेत्रों वाली यह सुन्दर गौ दिव्य है। वररोहे! यह वरुणनन्दन महर्षि वशिष्ठ की गौ है, जिनके लिए यह उत्तम तपोवन है। सुमध्यमे! जो मनुष्य इसका स्वादिष्ट दूध पीएगा, वह दस हजार वर्ष तक जीवित रहेगा और उस अवधि तक उसकी जवानी बनी रहेगी।' नृपश्रेष्ठ! यह सुनकर सुन्दर कमर और निश्छल शरीर वाली देवी ने अपने यशस्वी पति से कहा - 'मेरे प्रिय पतिदेव! मनुष्य लोक में एक राजकुमारी मेरी सखी है।'
 
The king with huge eyes like a bull! That goddess showed that auspicious cow to Vasuko named Deyo, which was very healthy. Her udders were very beautiful, full of milk, her tail and hooves were also very good. That beautiful cow was full of all the virtues and had the best good manners. The emperor who increases the happiness of Puruvansh! In this way, the goddess who increased the joy of Vasuka in ancient times, showed a cow with such virtuous qualities to her husband Vasuko. A king as mighty as Gajraj! As soon as Dyona saw the cow, he described its appearance and qualities and said to his wife, 'This beautiful cow with the hazel eyes is divine. Vararohe! This is the cow of Varunnandan Maharishi Vashishtha, for whom this is the best Tapovan. Sumadhyame! The man who drinks its delicious milk will live for ten thousand years and his youth will remain intact for that period.' Nripashrestha! On hearing this, the goddess with a beautiful waist and flawless body said to her illustrious husband - 'My dear husband! In the human world, a princess is my friend.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)