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mahabharat 1.99.10: ऋषियों द्वारा सेवित उस पवित्र एवं सुन्दर तपस्वी वन में रहकर वह गौ निर्भय होकर चारों ओर चरती थी।   |   mahabharat अध्याय 1.99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.99.10 
सा तस्मिंस्तापसारण्ये वसन्ती मुनिसेविते।
चचार पुण्ये रम्ये च गौरपेतभया तदा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों द्वारा सेवित उस पवित्र एवं सुन्दर तपस्वी वन में रहकर वह गौ निर्भय होकर चारों ओर चरती थी।
 
Living in that sacred and beautiful ascetic forest served by the sages, that cow grazed fearlessly all around. 10.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)