Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.98.8-9: दिव्य रूप वाली और तीनों मार्गों से यात्रा करने वाली देवी गंगा ने अत्यंत सुंदर मनुष्य रूप धारण किया और परम प्रतापी राजा महाराज शान्तनु की सुंदर पत्नी के रूप में प्राप्त हुईं, जो देवताओं के राजा इन्द्र के समान तेजस्वी थे और सौभाग्य से उन्हें इच्छित समस्त सुख प्राप्त हो रहे थे ॥8-9॥ | mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिव्यरूपा हि सा देवी गङ्गा त्रिपथगामिनी।
मानुषं विग्रहं कृत्वा श्रीमन्तं वरवर्णिनी॥ ८॥
भाग्योपनतकामस्य भार्या चोपनताभवत् ।
शान्तनोर्नृपसिंहस्य देवराजसमद्युते:॥ ९॥
अनुवाद
दिव्य रूप वाली और तीनों मार्गों से यात्रा करने वाली देवी गंगा ने अत्यंत सुंदर मनुष्य रूप धारण किया और परम प्रतापी राजा महाराज शान्तनु की सुंदर पत्नी के रूप में प्राप्त हुईं, जो देवताओं के राजा इन्द्र के समान तेजस्वी थे और सौभाग्य से उन्हें इच्छित समस्त सुख प्राप्त हो रहे थे ॥8-9॥
Goddess Ganga, who has a divine form and travels the three paths, assumed a very beautiful human form and was obtained as the beautiful wife of Maharaja Shantanu, the most glorious king, who was as illustrious as the king of gods, Indra, and who by good fortune was getting all the happiness he desired. ॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥