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mahabharat 1.98.7: उसके उत्तम चरित्र, सदाचार, सौन्दर्य, उदारता, सद्गुण और एकान्त सेवा से महाराज शान्तनु बहुत प्रसन्न हुए ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.98.7 
स तस्या: शीलवृत्तेन रूपौदार्यगुणेन च।
उपचारेण च रहस्तुतोष जगतीपति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उसके उत्तम चरित्र, सदाचार, सौन्दर्य, उदारता, सद्गुण और एकान्त सेवा से महाराज शान्तनु बहुत प्रसन्न हुए ॥7॥
 
His excellent character, good conduct, beauty, generosity, virtues and solitary service pleased Maharaja Shantanu very much. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)