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mahabharat 1.98.6: अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाले राजा शांतनु ने उस देवी को पाया और इच्छानुसार उसका भोग करने लगे। उनके पिता ने उन्हें देवी से कुछ भी न माँगने का आदेश दिया था। अतः उनकी आज्ञा का पालन करते हुए राजा ने उनसे कुछ भी नहीं माँगा।   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.98.6 
आसाद्य शान्तनुस्तां च बुभुजे कामतो वशी।
न प्रष्टव्येति मन्वानो न स तां किंचिदूचिवान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाले राजा शांतनु ने उस देवी को पाया और इच्छानुसार उसका भोग करने लगे। उनके पिता ने उन्हें देवी से कुछ भी न माँगने का आदेश दिया था। अतः उनकी आज्ञा का पालन करते हुए राजा ने उनसे कुछ भी नहीं माँगा।
 
King Shantanu, who had control over his senses, found that goddess and started enjoying her as per his wish. His father had ordered him not to ask her anything. So, obeying his orders, the king did not ask her anything.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)