Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.98.15: तदनन्तर जब आठवाँ पुत्र उत्पन्न हुआ, तब राजा ने शोक से पीड़ित होकर तथा अपने पुत्र के प्राण बचाने की इच्छा से अपनी हँसती हुई पत्नी से कहा -॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.98.15 
अथैनामष्टमे पुत्रे जाते प्रहसतीमिव।
उवाच राजा दु:खार्त: परीप्सन् पुत्रमात्मन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब आठवाँ पुत्र उत्पन्न हुआ, तब राजा ने शोक से पीड़ित होकर तथा अपने पुत्र के प्राण बचाने की इच्छा से अपनी हँसती हुई पत्नी से कहा -॥15॥
 
Thereafter when the eighth son was born, the king, grief-stricken and desiring to save his son's life, said to his smiling wife -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)