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mahabharat 1.98.13: भरत! जो भी पुत्र उत्पन्न होता, उसे वह गंगा के जल में डाल देती और कहती, "मैं तुम्हें (इस श्राप से मुक्त करके) प्रसन्न कर रही हूँ।" ऐसा कहकर गंगा प्रत्येक बालक को जल में डुबो देती।   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.98.13 
जातं जातं च सा पुत्रं क्षिपत्यम्भसि भारत।
प्रीणाम्यहं त्वामित्युक्त्वा गङ्गा स्रोतस्यमज्जयत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरत! जो भी पुत्र उत्पन्न होता, उसे वह गंगा के जल में डाल देती और कहती, "मैं तुम्हें (इस श्राप से मुक्त करके) प्रसन्न कर रही हूँ।" ऐसा कहकर गंगा प्रत्येक बालक को जल में डुबो देती।
 
Bharata! Every son born to her, she would throw him into the waters of the Ganges and say, "I am making you happy (by freeing you from this curse)." Saying this, Ganga would drown every child in the waters.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)