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mahabharat 1.97.d4: जनमेजय! तत्पश्चात् अनेक ब्राह्मणों ने एकत्रित होकर वैदिक रीति से शान्तनु का नामकरण संस्कार किया।   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  1.97.d4 
नामकर्म च विप्रास्तु चक्रु: परमसत्कृतम्।
शान्तनोरवनीपाल वेदोक्तै: कर्मभिस्तदा॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! तत्पश्चात् अनेक ब्राह्मणों ने एकत्रित होकर वैदिक रीति से शान्तनु का नामकरण संस्कार किया।
 
Janamejaya! Thereafter many Brahmins got together and performed the naming ceremony of Shantanu according to Vedic rituals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)