Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.97.7: स्त्री बोली - हे राजन! मैं अशुभ या दुर्भाग्य लाने वाली नहीं हूँ। मैं संभोग के लिए अयोग्य नहीं हूँ और न ही ऐसी हूँ कि कोई मुझ पर कभी कलंक लगा सके। मैं एक दिव्य कन्या और सुंदर स्त्री हूँ जो आपके प्रेम में यहाँ आई हूँ। अतः कृपया मुझे स्वीकार करें। | mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्त्र्युवाच
नाश्रेयस्यस्मि नागम्या न वक्तव्या च कर्हिचित्।
भजन्तीं भज मां राजन् दिव्यां कन्यां वरस्त्रियम्॥ ७॥
अनुवाद
स्त्री बोली - हे राजन! मैं अशुभ या दुर्भाग्य लाने वाली नहीं हूँ। मैं संभोग के लिए अयोग्य नहीं हूँ और न ही ऐसी हूँ कि कोई मुझ पर कभी कलंक लगा सके। मैं एक दिव्य कन्या और सुंदर स्त्री हूँ जो आपके प्रेम में यहाँ आई हूँ। अतः कृपया मुझे स्वीकार करें।
The woman said - O King! I am not inauspicious or a person who brings misfortune. I am not unfit for intercourse and I am not such that anyone can ever put a stigma on me. I am a divine girl and a beautiful woman who has come here in love with you. So please accept me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥