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mahabharat 1.97.4: राजा प्रतीप ने अपनी गोद में बैठी हुई उस सुदर्शनी से पूछा - 'कल्याणी! तुम्हारा कौन-सा प्रिय कार्य मैं करूँ? तुम्हारी क्या इच्छा है?'॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.97.4 
प्रतीपस्तु महीपालस्तामुवाच यशस्विनीम्।
करोमि किं ते कल्याणि प्रियं यत् तेऽभिकाङ्क्षितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजा प्रतीप ने अपनी गोद में बैठी हुई उस सुदर्शनी से पूछा - 'कल्याणी! तुम्हारा कौन-सा प्रिय कार्य मैं करूँ? तुम्हारी क्या इच्छा है?'॥4॥
 
King Pratipa asked the illustrious lady sitting on his lap - 'Kalyani! Which of your favourite tasks should I perform? What is your wish?'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)