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mahabharat 1.97.26: राजाओं में श्रेष्ठ शांतनु, सिद्धों और चारणों की सेवा में गंगा नदी के तट पर अकेले विचरण करते थे तथा हिंसक पशुओं और जंगली भैंसों का वध करते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.97.26 
स मृगान् महिषांश्चैव विनिघ्नन् राजसत्तम:।
गङ्गामनुचचारैक: सिद्धचारणसेविताम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजाओं में श्रेष्ठ शांतनु, सिद्धों और चारणों की सेवा में गंगा नदी के तट पर अकेले विचरण करते थे तथा हिंसक पशुओं और जंगली भैंसों का वध करते थे।
 
Shantanu, the best of kings, used to roam alone on the banks of river Ganga, served by Siddhas and Charanas, killing ferocious animals and wild buffaloes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)