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mahabharat 1.97.23: 'अनघ! तुम्हें उसके काम के बारे में कोई प्रश्न नहीं पूछना चाहिए। यदि वह तुमसे प्रेम करती है, तो मेरी अनुमति से उसे अपनी पत्नी बना लो।' राजा प्रतीप ने अपने पुत्र से ये वचन कहे।   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.97.23 
यच्च कुर्यान्न तत् कर्म सा प्रष्टव्या त्वयानघ।
मन्नियोगाद् भजन्तीं तां भजेथा इत्युवाच तम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'अनघ! तुम्हें उसके काम के बारे में कोई प्रश्न नहीं पूछना चाहिए। यदि वह तुमसे प्रेम करती है, तो मेरी अनुमति से उसे अपनी पत्नी बना लो।' राजा प्रतीप ने अपने पुत्र से ये वचन कहे।
 
'Anagh! You should not ask any questions about the work she does. If she loves you, then with my permission make her your wife.' King Pratipa said these words to his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)