Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.97.2-3: उस समय सुन्दरी गंगाजी उत्तम गुणों से युक्त युवती का रूप धारण करके जल से निकलकर स्वाध्याय में तत्पर राजा प्रतीप की दाहिनी जंघा पर बैठ गईं। उस समय उनका रूप बड़ा ही मनोरम था, उनकी शोभा स्वर्ग की अप्सरा के समान थी और उनका मुख अत्यंत मनोहर था॥2-3॥ | mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय सुन्दरी गंगाजी उत्तम गुणों से युक्त युवती का रूप धारण करके जल से निकलकर स्वाध्याय में तत्पर राजा प्रतीप की दाहिनी जंघा पर बैठ गईं। उस समय उनका रूप बड़ा ही मनोरम था, उनकी शोभा स्वर्ग की अप्सरा के समान थी और उनका मुख अत्यंत मनोहर था॥2-3॥
At that time, the beautiful Ganga emerged from the water in the form of a young woman endowed with excellent qualities and sat on the right thigh of the king Pratipa, who was engaged in self-study. At that time, her form was very captivating; her beauty was like that of a celestial nymph and her face was extremely charming.॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥