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mahabharat 1.97.16: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! राजा प्रतीप ने 'ऐसा ही हो' कहकर उसकी शर्त स्वीकार कर ली। तत्पश्चात वह वहाँ से अन्तर्धान हो गयी।   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.97.16 
वैशम्पायन उवाच
तथेत्युक्ता तु सा राजंस्तत्रैवान्तरधीयत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! राजा प्रतीप ने 'ऐसा ही हो' कहकर उसकी शर्त स्वीकार कर ली। तत्पश्चात वह वहाँ से अन्तर्धान हो गयी।
 
Vaishmpayana says- Janamejaya! King Pratipa accepted her condition saying 'So be it'. Thereafter she disappeared from there itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)