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mahabharat 1.97.13: आप पृथ्वी के समस्त राजाओं में सर्वश्रेष्ठ शरणस्थल हैं। मैं आपके गुणों का वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं कर सकता।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.97.13 
पृथिव्यां पार्थिवा ये च तेषां यूयं परायणम्।
गुणा न हि मया शक्या वक्तुं वर्षशतैरपि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आप पृथ्वी के समस्त राजाओं में सर्वश्रेष्ठ शरणस्थल हैं। मैं आपके गुणों का वर्णन सौ वर्षों में भी नहीं कर सकता।॥13॥
 
You are the best refuge of all the kings on earth. I cannot describe your qualities even in a hundred years.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)