Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.97.10: पुरुष की केवल बाईं जांघ ही स्त्री के भोग के योग्य है; परंतु तुमने उसे त्याग दिया है। इसलिए हे गणिका! मैं तुम्हारे प्रति काम-भाव से व्यवहार नहीं करूँगा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.97.10 
सव्योरु: कामिनीभोग्यस्त्वया स च विवर्जित:।
तस्मादहं नाचरिष्ये त्वयि कामं वराङ्गने॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पुरुष की केवल बाईं जांघ ही स्त्री के भोग के योग्य है; परंतु तुमने उसे त्याग दिया है। इसलिए हे गणिका! मैं तुम्हारे प्रति काम-भाव से व्यवहार नहीं करूँगा॥10॥
 
Only the left thigh of a man is fit for the enjoyment of a woman; but you have abandoned it. Therefore, O courtesan, I will not behave in a lustful manner towards you.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)