Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.96.8-11: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब राजा महाभिष ने अन्य अनेक तपस्वी राजाओं का विचार करके पराक्रमी राजा प्रतीप को अपना पिता चुना। राजा महाभिष को धैर्य खोते देख महाप्रतापी गंगा मन ही मन उनका स्मरण करते हुए लौट गईं। मार्ग में जाते हुए गंगा ने वसुदेवताओं को देखा। उनके शरीर स्वर्ग से नीचे गिर रहे थे। वे मोहित और मलिन दिख रहे थे। उन्हें इस रूप में देखकर नदियों में श्रेष्ठ गंगा ने पूछा -॥8-11॥ | mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब राजा महाभिष ने अन्य अनेक तपस्वी राजाओं का विचार करके पराक्रमी राजा प्रतीप को अपना पिता चुना। राजा महाभिष को धैर्य खोते देख महाप्रतापी गंगा मन ही मन उनका स्मरण करते हुए लौट गईं। मार्ग में जाते हुए गंगा ने वसुदेवताओं को देखा। उनके शरीर स्वर्ग से नीचे गिर रहे थे। वे मोहित और मलिन दिख रहे थे। उन्हें इस रूप में देखकर नदियों में श्रेष्ठ गंगा ने पूछा -॥8-11॥
Vaishampayana says - Janamejaya! Then king Mahabhis, after thinking of many other ascetic kings, chose the mighty king Pratipa as his father. The mighty river Ganga, seeing king Mahabhis losing patience, returned thinking of him in her mind. While going on the way, Ganga saw the Vasudevatas. Their bodies were falling down from heaven. They were looking deluded and dirty. Seeing them in this form, Ganga, the best of the rivers, asked -॥ 8-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥