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mahabharat 1.96.23: गंगाजी से यह शर्त रखकर वसु लोग अपनी इच्छानुसार प्रसन्नतापूर्वक चले गए।   |   mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.96.23 
एवं ते समयं कृत्वा गङ्गया वसव: सह।
जग्मु: संहृष्टमनसो यथासंकल्पमञ्जसा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
गंगाजी से यह शर्त रखकर वसु लोग अपनी इच्छानुसार प्रसन्नतापूर्वक चले गए।
 
Having made this condition with Gangaji, the Vasus happily went away according to their wish. 23.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि महाभिषोपाख्याने षण्णवतितमोऽध्याय:॥ ९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें महाभिषोपाख्यानविषयक छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)