Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.96.16: "शुभ! हमने यह प्रार्थना इसलिए की है कि हमें मनुष्य स्त्रियों के गर्भ में प्रवेश न करना पड़े।" वसुओं के ऐसा कहने पर गंगाजी ने "ऐसा ही हो" कहकर इस प्रकार कहा॥16॥ | mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मानुषीणां जठरं प्रविशेम वयं शुभे।
इत्युक्ता तैश्च वसुभिस्तथेत्युक्त्वाब्रवीदिदम्॥ १६॥
अनुवाद
"शुभ! हमने यह प्रार्थना इसलिए की है कि हमें मनुष्य स्त्रियों के गर्भ में प्रवेश न करना पड़े।" वसुओं के ऐसा कहने पर गंगाजी ने "ऐसा ही हो" कहकर इस प्रकार कहा॥16॥
"Shubh! We have made this request so that we do not have to enter the wombs of human women." When the Vasus said this, Gangaji said "So be it" and then spoke thus.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥