Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.96.12-14: तुम्हारा दिव्य रूप कैसे नष्ट हो गया? क्या देवतागण सुरक्षित हैं? तब वसुदेवताओं ने गंगा से कहा - 'महानदी! महात्मा वसिष्ठ ने एक छोटे से अपराध के कारण क्रोधित होकर हमें शाप दे दिया है। एक दिन जब वसिष्ठ वृक्षों की आड़ में संध्या उपासना कर रहे थे, तब हम सबने मोहवश उनका मार्ग पार कर लिया (और उनकी गाय का अपहरण कर लिया)। इससे क्रोधित होकर उन्होंने हमें शाप दे दिया कि 'तुम सब मनुष्य योनि में जन्म लो।'॥12-14॥ | mahabharat अध्याय 1.96: महाभिषको ब्रह्माजीका शाप तथा शापग्रस्त वसुओंके साथ गंगाकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम्हारा दिव्य रूप कैसे नष्ट हो गया? क्या देवतागण सुरक्षित हैं? तब वसुदेवताओं ने गंगा से कहा - 'महानदी! महात्मा वसिष्ठ ने एक छोटे से अपराध के कारण क्रोधित होकर हमें शाप दे दिया है। एक दिन जब वसिष्ठ वृक्षों की आड़ में संध्या उपासना कर रहे थे, तब हम सबने मोहवश उनका मार्ग पार कर लिया (और उनकी गाय का अपहरण कर लिया)। इससे क्रोधित होकर उन्होंने हमें शाप दे दिया कि 'तुम सब मनुष्य योनि में जन्म लो।'॥12-14॥
How did your divine form get destroyed? Are the gods safe? Then the Vasudevatas said to Ganga - 'Mahanadi! Mahatma Vasishtha has cursed us in anger due to a small offence. One day when Vasishtha was performing Sandhya Upasana under the cover of trees, we all, out of attachment, crossed his path (and kidnapped his cow). Angered by this, he cursed us that 'you all should take birth as humans'.॥12-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥