श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  1.95.90 
भवति चात्र श्लोक:—
इदं हि वेदै: समितं पवित्रमपि चोत्तमम्।
धन्यं यशस्यमायुष्यं श्रोतव्यं नियतात्मभि:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
इस सम्बन्ध में यह श्लोक प्रसिद्ध है - 'यह महाभारत वेदों के समान पवित्र, कल्याणकारी तथा धन, यश और आयु की प्राप्ति में सहायक है। मन को वश में करने वाले मुनियों को इसका सदैव श्रवण करना चाहिए ॥90॥
 
This verse is famous in this regard - 'This Mahabharata is as sacred as the Vedas, it is good and it helps in attaining wealth, fame and longevity. Sages who control their mind should always listen to it. 90॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि पूरुवंशानुकीर्तने पञ्चनवतितमोऽध्याय:॥ ९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पूरुवंशानुवर्णनविषयक पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९५॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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