| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 1.95.9  | अत्रानुवंशश्लोको भवति—
यदुं च तुर्वसुं चैव देवयानी व्यजायत।
द्रुह्युं चानुं च पूरुं च शर्मिष्ठा वार्षपर्वणी॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | यहाँ उनके वंश का परिचय देने के लिए यह श्लोक कहा गया है - देवयानी ने यदु और तुर्वसु नाम के दो पुत्रों को जन्म दिया तथा वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठाने ने द्रुह्यु, अनु और पुरु नाम के तीन पुत्रों को जन्म दिया ॥9॥ | | | | Here this verse is said to introduce their lineage - Devayani gave birth to two sons named Yadu and Turvasu and Sharmisthane, daughter of Vrishparva, gave birth to three sons named Druhyu, Anu and Puru. 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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