श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  1.95.89 
परं हीदं भारतं भगवता व्यासेन प्रोक्तं पावनं ये ब्राह्मणादयो वर्णा: श्रद्दधाना अमत्सरा मैत्रा वेदसम्पन्ना: श्रोष्यन्ति, तेऽपि स्वर्गजित: सुकृतिनोऽशोच्या: कृताकृते भवन्ति॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण आदि वर्णों के लोग स्वार्थ से रहित, मैत्रीभाव से युक्त और वेदाध्ययन से युक्त होकर भगवान व्यास द्वारा कहे गए इस परम पवित्र महाभारत ग्रन्थ को भक्तिपूर्वक सुनेंगे, वे भी स्वर्ग के अधिकारी होंगे और पुण्यात्मा होंगे तथा उन्हें इस बात का शोक नहीं होगा कि मैंने अमुक कर्म क्यों किया और अमुक कर्म क्यों नहीं किया॥89॥
 
Those people of Brahmin and other castes, who are free from selfishness, united with friendship and full of Veda study, will listen to this most sacred Mahabharata book told by Lord Vyas with devotion, they will also be entitled to heaven and will be virtuous souls and they will not have any sorrow as to why they did a certain deed and why they did not do a certain deed. 89॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas