श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.95.80 
सहदेवोऽपि माद्रीमेव स्वयंवरे विजयां नामोपयेमे मद्रराजस्य द्युतिमतो दुहितरम्। तस्यां पुत्रमजनयत् सुहोत्रं नाम॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
सहदेव ने मद्रदेश की राजकुमारी विजया को भी उसके स्वयंवर में प्राप्त किया था। वह मद्रराज द्युतिमान की पुत्री थी। उसके गर्भ से उसने सुहोत्र नामक पुत्र को जन्म दिया ॥80॥
 
Sahadev also received Madradesh's princess Vijaya in her swayamvara. She was the daughter of Madra king Dyutiman. From her womb he gave birth to a son named Suhotra. 80॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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