| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन » श्लोक 76-77 |
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| | | | श्लोक 1.95.76-77  | युधिष्ठिरस्तु गोवासनस्य शैब्यस्य देविकां नाम कन्यां स्वयंवरे लेभे। तस्यां पुत्रं जनयामास यौधेयं नाम॥ ७६॥
भीमसेनोऽपि काश्यां बलन्धरां नामोपयेमे वीर्यशुल्काम्। तस्यां पुत्रं सर्वगं नामोत्पादयामास॥ ७७॥ | | | | | | अनुवाद | | युधिष्ठिर ने शिबिदेश के राजा गोवासन की पुत्री देविका को स्वयंवर में प्राप्त किया और उसके गर्भ से एक पुत्र को जन्म दिया; जिसका नाम यौधेय रखा गया। भीमसेन ने काशीराज की पुत्री बलंधरा से भी विवाह किया; उसे प्राप्त करने की शर्त बल और पराक्रम थी, अर्थात् शर्त यह थी कि जो अधिक शक्तिशाली हो, वही उससे विवाह कर सकता था। भीमसेन ने उसके गर्भ से एक पुत्र उत्पन्न किया, जिसका नाम सर्वग रखा गया। 76-77 | | | | Yudhishthira obtained Devika, the daughter of King Govasana of Shibidesh, in a swayamvara and gave birth to a son from her womb; whose name was Yaudheya. Bhimasena also married Balandhara, the daughter of the King of Kashi; the fee to obtain her was strength and valour i.e. the condition was that only the one who was more powerful could marry her. Bhimasena produced a son from her womb, whose name was Sarvaga. 76-77. | | ✨ ai-generated | | |
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