| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन » श्लोक 75 |
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| | | | श्लोक 1.95.75  | | कुशलिन: पुत्रांश्चोत्पादयामासु:। प्रतिविन्ध्यं युधिष्ठिर:, सुतसोमं वृकोदर:, श्रुतकीर्तिमर्जुन:, शतानीकं नकुल:, श्रुतकर्माणं सहदेव इति॥ ७५॥ | | | | | | अनुवाद | | वहाँ सुखपूर्वक रहते हुए उन्होंने द्रौपदी से पाँच पुत्र उत्पन्न किये। युधिष्ठिर से प्रतिविन्ध्य, भीमसेन से सुतसोम, अर्जुन से श्रुतकीर्ति, नकुल से शतानिका और सहदेव से श्रुतकर्मा उत्पन्न हुए। | | | | Living there happily, he begot five sons from Draupadi. Yudhishthira begot Prativindhya, Bhimasena begot Sutasoma, Arjuna begot Shrutakirti, Nakula begot Shatanika and Sahadeva begot Shrutakarma. | | ✨ ai-generated | | |
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