श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.95.71 
तत्रापि जतुगृहे दग्धुं समारब्धा न शकिता विदुरमन्त्रितेनेति॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ भी लाक्षागृह में उन्हें जलाने का प्रयत्न किया गया; परंतु पाण्डवों ने विदुरजी की सलाह मान ली थी, इसलिए शत्रु उन्हें जला न सके ॥ 71॥
 
There too, an attempt was made to burn him in the Lakhshagriha; but because the Pandavas acted on Vidurji's advice, the enemies were not able to burn him. ॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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