श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.95.69 
पापाचारो राक्षसीं बुद्धिमाश्रितोऽनेकैरुपायैरुद्धर्तुं च व्यवसित:; भावित्वाच्चार्थस्य न शकितास्ते समुद्धर्तुम्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
पापी दुर्योधन ने राक्षसी बुद्धि का सहारा लेकर अनेक प्रकार से पाण्डवों को नष्ट करने का प्रयत्न किया। परन्तु जो होना है, वह होकर ही रहेगा; इसलिए दुर्योधन आदि पाण्डवों का नाश करने में सफल नहीं हो सके।
 
The sinful Duryodhana, taking recourse to demonic intellect, tried to uproot the Pandavas by various means. But what is destined to happen, will happen; therefore Duryodhana and others could not succeed in destroying the Pandavas. 69.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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