श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.95.67 
तच्च वाक्यमुपश्रुत्य भगवतामन्तरिक्षात् पुष्पवृष्टि: पपात; देवदुन्दुभयश्च प्रणेदु:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उन महामना मुनियों की बातें सुनकर आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी और देवताओं के नगाड़े बजने लगे।
 
On hearing the words of those glorious sages, flowers began to rain down from the sky and the drums of the gods started sounding. 67.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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