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श्लोक 1.95.58  |
| पाण्डोस्तु द्वे भार्ये बभूवतु: कुन्ती पृथा नाम माद्री च इत्युभे स्त्रीरत्ने॥ ५८॥ |
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| अनुवाद |
| पाण्डुकी की दो पत्नियाँ थीं - कुन्तिभोज की पुत्रियाँ पृथा और माद्री । ये दोनों स्त्रियाँ रत्नों के समान रूप वाली थीं ॥58॥ |
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| Panduki had two wives; Kuntibhoja's daughters Pritha and Madri. Both of these women had the form of gems. 58॥ |
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