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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन
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श्लोक 54
श्लोक
1.95.54
सा तमुवाच—भ्राता तवानपत्य एव स्वर्यातो विचित्रवीर्य:। साध्वपत्यं तस्योत्पादयेति॥ ५४॥
अनुवाद
सत्यवती ने उससे कहा, 'पुत्र! तुम्हारे भाई विचित्रवीर्य निःसंतान मर गए। अतः उनके वंश की रक्षा के लिए एक उत्तम संतान उत्पन्न करो।'
Satyavati said to him, 'Son! Your brother Vichitravirya died without any children. So, produce a good child to protect his lineage.'
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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