श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.95.47 
शान्तनु: खलु गङ्गां भागीरथीमुपयेमे। तस्यामस्य जज्ञे देवव्रतो नाम: यमाहुर्भीष्ममिति॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
शान्तनु ने भागीरथी गंगा को अपनी पत्नी बनाया; जिसके गर्भ से उन्हें देवव्रत नामक पुत्र प्राप्त हुआ, जिसे लोग 'भीष्म' कहते हैं॥ 47॥
 
Shantanu made Bhagirathi Ganga his wife; from whose womb he received a son named Devavrata, whom people call 'Bhishma'.॥ 47॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas