श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.95.45 
देवापि: खलु बाल एवारण्यं विवेश। शान्तनुस्तु महीपालो बभूव॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
देवापि बाल्यकाल में ही वन में चले गए थे, अतः शान्तनु राजा हुए ॥45॥
 
Devapi went to the forest in his childhood, hence Shantanu became the king. 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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