श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.95.4 
सद्धर्मगुणमाहात्म्यैरभिवर्धितमुत्तमम्।
विष्टभ्य लोकांस्त्रीनेषां यश: स्फीतमवस्थितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अपने उत्तम धर्म और गुणों के कारण अत्यधिक बढ़े हुए इन राजाओं की महान् एवं यशस्वी कीर्ति तीनों लोकों में फैल रही है ॥4॥
 
The great and illustrious fame of these kings, who have grown enormously due to their excellent religion and virtues, is spreading in all the three worlds. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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