श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.95.38 
संवरण: खलु वैवस्वतीं तपतीं नामोपयेमे। तस्यामस्य जज्ञे कुरु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
संवर्णा ने सूर्यकन्या तपती से विवाह किया; जिसके गर्भ से कुरुक का जन्म हुआ। 38॥
 
Samvarna married Suryakanya Tapati; From whose womb Kuruka was born. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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