श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.95.34 
सुहोत्र: खल्विक्ष्वाकुकन्यामुपयेमे सुवर्णां नाम। तस्यामस्य जज्ञे हस्ती; य इदं हास्तिनपुरं स्थापयामास। एतदस्य हास्तिनपुरत्वम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
सुहोत्र ने इक्ष्वाकु वंश की कन्या सुवर्णा से विवाह किया। उसके गर्भ से उन्हें हस्ति नामक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसने हस्तिनापुर नामक नगर बसाया। हस्ति द्वारा बसाए जाने के कारण ही इस नगर का नाम 'हस्तिनापुर' पड़ा।
 
Suhotra married Suvarna, a daughter of Ikshwaku clan. From her womb, he had a son named Hasti who founded this city named Hastinapur. This city came to be known as 'Hastinapur' because Hasti founded it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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