श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.95.31 
रेतोधा: पुत्र उन्नयति नरदेव यमक्षयात्।
त्वं चास्य धाता गर्भस्य सत्यमाह शकुन्तला॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'गर्भ धारण करने वाला पिता ही पुत्र रूप में जन्म लेता है। नरदेव! पुत्र अपने पिता को यमलोक से छुड़ाता है। आप ही इस गर्भ को धारण करेंगे। शकुन्तला का कथन सत्य है। 31॥
 
'It is the father who conceives who is born in the form of a son. Nardev! The son rescues his father from Yamaloka. You are the one who will carry this womb. Shakuntala's statement is true. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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