|
| |
| |
श्लोक 1.95.27  |
अत्रानुवंशश्लोको भवति—
तंसुं सरस्वती पुत्रं मतिनारादजीजनत्।
ईलिनं जनयामास कालिंगॺां तंसुरात्मजम्॥ २७॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| यहाँ वंशक्रम सूचित करने वाला श्लोक इस प्रकार है - सरस्वती ने मतिनारा से तनसु नामक पुत्र उत्पन्न किया और तनसु ने कलिंग की राजकुमारी के गर्भ से इलिन नामक पुत्र उत्पन्न किया॥27॥ |
| |
| Here the verse indicating the lineage is as follows - Saraswati begot a son named Tansu from Matinara and Tansu begot a son named Ilin from the womb of the princess of Kalinga.॥27॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|