श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.95.27 
अत्रानुवंशश्लोको भवति—
तंसुं सरस्वती पुत्रं मतिनारादजीजनत्।
ईलिनं जनयामास कालिंगॺां तंसुरात्मजम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यहाँ वंशक्रम सूचित करने वाला श्लोक इस प्रकार है - सरस्वती ने मतिनारा से तनसु नामक पुत्र उत्पन्न किया और तनसु ने कलिंग की राजकुमारी के गर्भ से इलिन नामक पुत्र उत्पन्न किया॥27॥
 
Here the verse indicating the lineage is as follows - Saraswati begot a son named Tansu from Matinara and Tansu begot a son named Ilin from the womb of the princess of Kalinga.॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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