श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.95.20 
महाभौम: खलु प्रासेनजितीमुपयेमे सुयज्ञां नाम। तस्यामस्य जज्ञे अयुतनायी; य: पुरुषमेधानामयुतमानयत्, तेनास्यायुतनायित्वम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महाभौमा ने प्रसेनजित की पुत्री सुयज्ञ से विवाह किया। उसके गर्भ से उन्हें अयुत्तनायी नामक पुत्र प्राप्त हुआ; जिसने दस हजार पुरुषमेध यज्ञ सम्पन्न किए। अयुत् यज्ञों का अनुष्ठान करने के कारण ही वह अयुत्नायी कहलाया। 20॥
 
Mahabhauma married Suyajna, daughter of Prasenjit. From her womb he got a son named Ayuttanayi; Who performed ten thousand Purushmedha 'Yagya'. It was because of performing the rituals of Ayut Yagyas that he became known as Ayutnaayi. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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