श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.95.14 
संयाति: खलु दृषद्वतो दुहितरं वराङ्गीं नामोपयेमे। तस्यामस्य जज्ञे अहंयाति:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
संयाति का विवाह दृषद्वान की पुत्री वरंगी से हुआ। उसके गर्भ से उसे अहन्याति नामक पुत्र प्राप्त हुआ। 14॥
 
Sanyati married Varangi, daughter of Drishadvan. From her womb he had a son named Ahanyati. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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