श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.95.12 
जनमेजय: खल्वनन्तां नामोपयेमे माधवीम्। तस्यामस्य जज्ञे प्राचिन्वान्; य: प्राचीं दिशं जिगाय यावत् सूर्योदयात्, ततस्तस्य प्राचिन्वत्त्वम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने मधुवंश की कन्या अनन्ता से विवाह किया। उसके गर्भ से प्राचीनवान नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। उसने एक ही दिन में पूर्व दिशा से सम्पूर्ण पूर्व दिशा को जीत लिया; इसलिए उसका नाम प्राचीनवान पड़ा॥12॥
 
Janamejaya married Ananta, a daughter of Madhuvansh. From her womb, a son named Prachinvan was born. He conquered the entire east direction from the east in a single day; hence his name became Prachinvan.॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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