श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 95: दक्ष प्रजापतिसे लेकर पूरुवंश, भरतवंश एवं पाण्डुवंशकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.95.11 
पूरोस्तु भार्या कौसल्या नाम। तस्यामस्य जज्ञे जनमेजयो नाम; यस्त्रीनश्वमेधानाजहार, विश्वजिता चेष्ट्वा वनं विवेश॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पुरु की पत्नी का नाम कौशल्या था (उसे पौष्टी भी कहते हैं)। उसके गर्भ से पुरु को जनमेजय (प्रवीर नाम) नामक पुत्र हुआ; जिसने तीन अश्वमेध यज्ञ किए और विश्वजित यज्ञ करके वानप्रस्थ आश्रम को अपनाया॥ 11॥
 
Puru's wife's name was Kausalya (she is also called Paushti). From her womb Puru had a son named Janamejaya (his other name is Praveer); who performed three Ashwamedha Yajnas and after performing Vishwajit Yajna adopted the Vanaprastha Ashram.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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